November 29, 2025

डायबिटीज के प्रकार, डायबिटीज के लक्षण, उपचार और सामान्य प्रश्न

शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाने से diabetes हो जाती है,  diabetes प्रायः दो प्रकार की होती है, Type 1 और Type 2 पर नए research में ये सामने आया है कि डायबिटीज प्रायः 5 प्रकार की होती है। 
 

टाइप 1 डायबिटीज- 

इसमें शरीर इन्सुलिन बनाना बंद कर देता है जिससे कि बाहर से इन्सुलिन लेना पड़ता है- 
 

Type 2 diabetes:

जब सेल्स produce हो रही इन्सुलिन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं करते है तो इसे NIDDM (non- insulin-dependent diabetes mellitus) भी कहते हैं।  

 

मधुमेह के लक्षण-

अनियंत्रित रूप से वजन का घटना या बढ़ना- 
वज़न का अचानक से घटना या बढ़ना भी  डायबिटीज के मॉस्ट common लक्षणों में से एक है,   
 
बिना मेहनत के भी थकान महसूस होना- अच्छी नींद लेने के बावजूद और बिना मेहनत के बावजूद थकावट महसूस होना भी डायबिटीज का लक्षण है। 
 
चोट भरने में देरी होना या चोट का ना भरना- अगर चोट लगने के बाद भी जख्म आसानी से ना भरे या जख्म भरने में काफी समय लगे तो ये डायबिटीज का एक लक्षण है।  
 
बार-बार पेशाब का आना-  डायबिटीज की शुरुआत में पेशाब बार बार आने लगता है, इसलिए अगर बार-बार पेशाब आए तो तुरंत डायबिटीज की जाँच करवानी चाहिए। 
 
बार बार भूख लगना- तेज भूख का लगना और खाना खाने के बाद भी भूख लगने लग जाए तो ये लक्षण डायबिटीज का हो सकता है। 
 
नजर की कमजोरी- आँखों की नजर कमजोर होना, धुँधलापन, अचानक आँखों के आगे अंधेरा छा जाना, दूर की नजर का कमजोर होना भी डायबिटीज का एक लक्षण हो सकता है। 

खुजली होने पर जख्म होना-  शरीर के किसी भाग पर खारिश होने पर जख्म हो जाए और वो जख्म जल्दी से ठीक ना हो तो वो डायबिटीज हो सकती है। 
 
स्किन प्रॉब्लम-  डायबिटीज में मुहांसे और ब्लैकहेड्स जैसी समस्याएँ बहुत तेजी से बढ़ने लग जाती है। 
 
मसूढ़ों से खून बहना-  मसूड़ों की सूजन या फिर दांत साफ़ करते समय दांतों से खून बहना भी डायबिटीज का एक लक्षण है। 
 
अधिक गुस्सा या फिर चिढ़चिढ़ापन- डायबिटीज के पेशेंट अक्सर काफी मूडी और चिड़चिड़े स्वाभाव के हो जाते हैं, उनका कहीं भी बाहर निकलने और काम करने का मन नहीं करता है केवल सोना अच्छा लगता है।
  
पैरों में झनझनाहट होना-  पैरों में झनझनाहट होना भी डायबिटीज का एक कारण है। 
 
त्वचा पर dark spot-  शुरुआत में डायबिटीज में घुटनो, हथेलियों, कोहनियों, हथेली के पिछले भाग पर dark स्पॉट हो जाते हैं। 
 

मधुमेह का इलाज- 

करेला- एक करेले का ज्यूस निकालकर इसमें स्वादानुसार नमक, काली मिर्ची और नीम्बू मिलाकर हर दूसरे दिन इसका सेवन करें। इसका एंटी डायबिटिक गुण रक्त में शर्करा को कम करता है जिससे कि इन्सुलिन की मात्रा बढ़ती है। 
दालचीनी- आधा चम्मच दाल चीनी को गुनगुने पानी में मिलाकर हर दूसरे दिन इसका सेवन करने से type 2 डायबिटिक में लाभकारी परिणाम मिलते हैं। इसमें मौजूद भरपूर antioxident शरीर के ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को कम करके उसकी जिद्दी फैट को कम करने में शरीर की मदद करती है। 
 
मेथी-  दो चम्मच दाना मेथी को एक कप गुनगुने पानी में भिगोकर रात भर छोड़ दें और अगले दिन सुबह छानकर भूखे पेट उस पानी को पीने से डायबिटीज में राहत मिलती है। मेथी में घुलनशील फाइबर काफी मात्रा में मौजूद होता है इसमें मौजूद ग्लैक्टोमेनन पाचन की दर को नियंत्रित करने के साथ ही कार्बोहायड्रेट के अवशोषण की दर को कम करके blood शुगर को कम करने में हमारी मदद करता है। 
 
एलोवेरा ज्यूस- एक कप एलोवेरा ज्यूस को दिन में एक या दो बार सेवन करने से भी डायबिटीज में राहत मिलती है। एलोवेरा में मौजूद इमोडिन शरीर के ग्लूकोस को कम करते हैं और इसमें दो तरह के फाइबर मूसिलेज और ग्‍लूकोमेनन पाए जाते हैं। 
 
शलजम- शलजम से भी रक्त में मौजूद ग्लूकोस कम होता है। शलजम में काफी मात्रा में  विटामिन सी, विटामिन के, बीटा कैरोटिन और पोटैशियम पाया जाता है।
 
तोरई–  तोरई में इन्सुलिन की तरह ही पेप्टाइड्स पाई जाती है, जो कि रक्त में ग्लूकोस को नियंत्रित करने में मदद करती है। 
लौकी का ज्यूस- लौकी में कार्ब्स की मात्रा नहीं होने के कारण लौकी का ज्यूस रक्त में मौजूद ग्लूकोस को कम करने के लिए काफी अच्छी औषधि मानी जाती है।    

परवल-  परवल इन्सुलिन को इन्सुलिन को काफी एक्टिव करता है जिससे की ग्लूकोस को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। परवल में दीपन पाचन गुण होने के कारण ये पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है। 
 
पालक-  पालक में फाइबर की उच्च मात्रा होने के साथ ही स्टार्च की मात्रा भी नहीं के बराबर ही होती है, और इसमें काफी कम मात्रा में  ग्लाइसेमिक इंडेक्स पाए जाते हैं, पालक आसानी से पचने के साथ ही शुगर को भी बढ़ने नहीं देता है। गाजर और पालक का ज्यूस पीने से डायबिटीज के कारण आँखों में आयी कमजोरी से भी राहत मिलती है। 
 
पपीता- पापीते में विटमिन और मिनरल्स संतुलित मात्रा में होने से रक्त में मौजूद ग्लूकोस काफी हद तक नियंत्रित रहता है।  

जामुन- जामुन के फल के साथ ही जमुन के बीज भी डायबिटीज को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं, जामुन के बीज में मौजूद एल्कलॉइड रक्त में मौजूद स्टार्च को शुगर में बदलने से रोकते हैं।  
  
लहसुन- लहसून की चाय एक बहुत ही अच्छा एंटीबायोटिक ड्रिंक है, जो अमीनो एसिड होमोसिस्टीन को कम करती है जो कि डायबिटीज के रोगियों के लिए एक बड़ा जोखिम वाला अमीनो एसिड होता है। 
 
गेहूं के जवारे- गेहूँ  में क्लोरोफिल के अलावा भरपूर मात्रा में कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट  पाए जाते हैं, जो कि कैंसर, डायबिटीज,किडनी  रक्त व रक्त संचार जैसी बिमारियों में काफी राहत मिलती है। 
 
आम के पत्ते- आम के प्रचुर मात्रा में एंथोसाइनिडिन नामक टैनिन पाया जाता है जो कि मधमेह की प्रारंभिक अवस्था में एक अच्छा इलाज माना जाता है। इसका सूखा पाउडर या फिर इसकी पत्तियों का काढ़ा पी सकते हैं। 
 
आँवला-  आंवले में उपस्थित पॉलीफेनोल ब्लड शुगर से होने वाले ऑक्‍सीडेटिव स्‍ट्रेस से रक्षा करने में शरीर की मदद करते हैं। ये हमारे शरीर को इन्सुलिन के प्रति अधिक क्रियाशील बनाकर इन्सुलिन का अवशोषण बढ़ाने में शरीर की मदद करता है, जिससे ग्लूकोज की मात्रा में गिरावट आती है।    
 
धूप-  विटामिन D भी इन्सुलिन के उत्पादन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जितनी विटामिन D की मात्रा की शरीर में कमी होगी उतना ही शरीर में type 2 डायबिटीज का खतरा भी बना रहेगा।  
 
पानी-  पानी खूब पीने से खून में मौजूद अतिरिक्त ग्लूकोज की मात्रा मूत्र के जरिए शरीर के बाहर निकल जाती है, जिससे कि डायबिटीज का खतरा काफी कम हो जाता है। 
 
विटामिन C-  विटामिन C भी रक्त में मौजूद शर्करा को कम करने में शरीर की मदद करता है।
  
दलिया-  डालिये में उपस्थित  बीटा-ग्लुकोन (Beta-glucans – कार्बोहाइड्रेट) blood ग्लूकोज  को कम करने के साथ ही ह्रदय रोग की समस्या को भी दूर करने में शरीर की मदद करते हैं। 
 
ग्रीन टी-  ग्रीन tea एक बढ़िया एंटीऑक्सीडेंट drink होने के साथ ही ग्लूकोज़ की मात्रा को भी नियंत्रित करने में शरीर की मदद करता है। 
 
अदरक का पानी-  अदरक में उच्च मात्रा पाया जाने वाला जिंक शरीर में इन्सुलिन की मात्रा को बढ़ता है जिससे कि डायबिटीज में राहत मिलती है। 
 
कलौंजी तेल- कलौंजी के तेल में काफी मात्रा में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में शरीर की मदद करते हैं। 
 
करी पत्ता- करी पत्ते में मौजूद एंटी-हाइपरग्लाइसेमिक गुणों की मदद से ये डायबिटीज से लड़ने काफी कारगर सिद्ध हो सकता है।  
 
 
विटामिन-बी के साथ ए, डी, ई व K-  विटामिन B के साथ A, D, E और K शरीर में इन्सुलिन की मात्रा को बढाने में शरीर की मदद करते हैं। 
 
अलसी- अलसी में काफी मात्रा में लिगनेन नाम का एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व होता है जो सेल्यूलोज का ही एक प्रकार होता है। जो शुगर को कण्ट्रोल करने में शरीर मदद करती है। 
 
General Question and Answers- 
शुगर और डायबिटीज में क्या अंतर होता है?

डायबिटीज में या तो शरीर में इन्सुलिन बनता नहीं है या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रह पाती। और शुगर इनमे स्टोर ना रहकर के हमारे खून में मौजूद रहता है। 
 
डायबिटीज कितना होना चाहिए? 
डायबिटीज फास्टिंग में 70-110 के बीच में और खाना खाने के बाद 110-140 के बीच रहनी चाहिये।   
डायबिटीज क्या है और इसे कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?
डायबिटीज अनुवांशिक, रहन सहन और पर्यावरणीय कारकों पर आधारित होता है। लेकिन खून में ग्लूकोज की मात्रा पर नियन्त्रिक करके डायबिटीज से बचा जा सकता है डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए संतुलित भोजन और व्यायाम करना बहुत ही उपयोगी होता है। 

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