November 29, 2025

History of Tata | Some question and answers about Tata Family

अगर आपको टाटा समूह के बारे में जानना है तो सबसे पहले आप टाटा समूह के संस्थापक के बारे में जानना आपके लिए बहुत जरूरी है तो सबसे पहले पर बात करते हैं टाटा समूह के संस्थापक जेआरडी टाटा के बारे में जिन का पूरा नाम था जमशेदजी नुसीरवानजी टाटा . 

जमशेदजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1839 ईस्वी में गुजरात राज्य के एक छोटे से जिले नवसारी में हुआ था उनके पिता नौशेरवान जी टाटा और उनकी माता जीवन बाई टाटा थी। 

नौशेरवानजी अपने खानदान के पहले व्यवसायी थे, अब किस्मत की तलाश में वे मुंबई आ गये। मुंबई में आकर उन्होंने बिजनेस की दुनिया में कदम रखा।  जमशेदजी महज 14 साल की उम्र में अपने पिता का उनके बिजनेस में साथ देने लगी।  
17 साल की उम्र में उनका प्रवेश मुंबई के एलफिंस्टन कॉलेज में हो क्या 1858 में मुंबई के एल्फिंस्टन कॉलेज में स्नातक होने के बाद वे अपने पिता के एक्सपोर्ट इम्पोर्ट के काम में हाथ बटाने लगे और उनके बिज़नेस की जापान, यूरोप, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका में शाखाएं खोलने में मदद करी। 
जमशेतजी टाटा के पिता ने उनको अफीम के कारोबार के बारे में समझने के लिए चीन भेजा। पर जमसेतजी  की चीन यात्रा के दौरान उनके पिता को अहसास हुआ कि भारत में कपास का व्यापार बहुत तेजी से फलफूल रहा है। 

29 साल की उम्र तक अपने पिता के व्यवसाय में काम करने के पश्चात 1839 ईस्वी में 21000 की पूंजी लगाकर उन्होंने अपना खुद का व्यवसाय करना शुरू करा।  1869 ईस्वी में जमशेदजी टाटा ने चिंचपोकली में एक दिवालिया तेल मिल को खरीद कर उसे कपास उद्योग में परिवर्तित कर उसका नाम एलेक्जेंड्रा मिल रख दिया।  

और आगे चलकर इस कंपनी को उन्होंने अच्छे-खासे मुनाफे में बेच दिया और इन पैसों से उन्होंने 1874 में नागपुर में एक कॉटन मिल की नींव राखी। 
मुंबई जैसी परम्परागत जगह को छोड़कर नागपुर जैसी छोटी जगह को कपास के व्यापार के लिए चुनने के लिए जमसेतजी को काफी आलोचना का भी सामना करना पड़ा, लेकिन इस फैसले में उनकी काफी दूरदर्शिता छिपी हुई थी। 

मुंबई के विपरीत नागपुर में जमीन काफी सास्ती होने के साथ ही कपास की खेती के लिए उपयुक्त संसाधन आसानी से मौजूद थे, और प्रचुर मात्रा में उपज होने के साथ ही वितरण की भी सुविधा आसानी से उपलब्ध थी। इसके कुछ समय की बाद ही जमसेतजी टाटा ने 1877 में महारानी मिल की शुरुआत करी और 1 januari 1877 में महारानी विक्टोरिया को भारत की रानी का खिताब मिलने के उपलक्ष्य में उन्होंने इसका यह नाम रखा।  

जमशेतजी टाटा अपने कुछ फैसलों के कारण असफल भी हुए 1885 में तात ने पांडिचेरी में एक अन्य कंपनी की स्थापना करी जिसका उद्देश्य था, फ्रांसीसी उपनिवेशों भारतीय कपड़ों का व्यापार करने का। पर बाद में कपड़ों की मांग की कमी के कारण वो अपने इस फैसले में असफल हुए। इस कार्य के चलते उन्होंने मुंबई की एडवांस मिल को खरीदकर बाद में उसे अहमदाबाद में एडवांस मिल को खरीदने के उद्देश्य से वापिस से चालू करा। 

टाटा ने इसका नाम एडवांस मिल इसलिए रखा क्योंकि ये मिल उस समय की सबसे उच्च तकनीक वाली मिलों में से एक थी। तकनीक के बल पर जमशेतजी का अहमदाबाद में काफी प्रभाव था। इसका एक कारण ये भी था कि जमसेतजी ने अपने समुदाय के आर्थिक उत्थान के लिए काफी काम करा। अपनी तकनीक और मेहनत के बल पर जमसेतजी ने भारत के कपास और कपड़ा उद्योग में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।  

 जमसेतजी टाटा ने स्वदेशी आंदोलन में भी काफी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। और स्वदेशी आंदोलन के वे पुरजोर समर्थक रहे। हालांकि 1905 तक स्वदेशी आंदोलन चालू नहीं हुआ था लेकिन सही मायनों में टाटा ने पहले स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत कर दी थी। 
स्वदेशी ब्रिटिश भारत का एक बहुत ही निर्णायक आंदोलन था जिसमें स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल पर ही फोकस किया गया था और टाटा ने उस समय मुंबई में बनी अपनी सूती कपड़ा मिल का नाम स्वदेशी मिल रखा। 
टाटा ने भारत के कई जगह की जाने वाली कपास की खेती को और तेजी से विकसित करने के लिए कई तरह के प्रयोग करे। वो चाहते थे के भारत उत्तम प्रकार के कपड़ों का एक मात्र निर्माता बने।   

सही मायने में जमशेदजी आधुनिक भारत के असली निर्माता थे और जितना भारत से उन्होंने लिया उससे कहीं ज्यादा उन्होंने भारत को दिया, उन्होंने 1903 में होटल ताज महल के नाम से भारत का पहला ऐसा होटल बनाया जो कि बिजली की व्यवस्था से परिपूर्ण था और उस होटल की लागत उस समय 4,21,00,000  रूपए पड़ी थी। 

इसके अलावा भारत में एक स्टील कंपनी की नींव रखना, एक जल विद्युत परियोजना की स्थापना करना और  विश्व प्रसिद्ध अध्ययन केंद्र खोलना उनके महत्वपूर्ण कदम थे जिससे भारत ही नहीं दुनिया के बाहर भी उन्होंने काफी प्रसिद्धि हासिल करी। 

2011 के इक्विटीमास्टर के एक सर्वे के अनुसार टाटा को करीब 61% लोगों ने सबसे ज्यादा विश्वसनीय कंपनी माना। 

Your questions our answers- 

Who is the real owner of Tata Group?
Jamsetji टाटा ने Tata Group की स्थापना करी।  

रतन टाटा के पिता का क्या नाम है? 
रतन टाटा के पिता का नाम नवल टाटा है। 

क्या रतन टाटा शादी शुदा हैं ? 
टाटा जिस लड़की से प्यार करते थे, 1962 की भारत चीन युद्ध में उस महिला के parents ने उन्हें उनसे विवाह करने के लिए मना कर दिया और रतन Tata तब से लेकर अब तक कुंवारे हैं। 

क्या रतन टाटा दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। 
रतन टाटा का टाटा ग्रुप टाटा ट्रस्ट के through अपना कारोबार करता है और ट्रस्ट किसी एक आदमी का नहीं होता है, इसलिए टाटा ग्रुप की दुनिया के व्यापार में काफी बड़ी भागीदारी होने के बाद और दुनिया सबसे बड़े groups में से एक होने के बावजूद भी सबसे अमीर नहीं है। 

क्या रतन टाटा billionaire हैं ?
Tata Group के लाभ का 65% प्रतिशत हिस्सा टाटा Trust के though सीधे धर्मार्थ संस्थाओं  चला जाता है इसलिए रतन टाटा की गिनती billionairs में नहीं है।  
टाटा ग्रुप का अगला उत्तराधिकारी कौन है।  21 फरवरी 2017 को नटराजन चंद्रशेखरन को टाटा समूह का अध्यक्ष बनाया गया। 

Who is Naval Tata? 
 नोएल टाटा एक इंडियन बिज़नेस man है, और trent limited के chaireman और टाटा international के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं इसके आलावा वे टाटा investment corporation के भी चेयरमैन हैं।  जो कि टाटा family का ही एक पार्ट है।  ये रतन टाटा के सौतेले भाई हैं, रतन टाटा के पिता की दूसरी शादी सिमोन टाटा के साथ हुई, और उनसे Noel Tata का जन्म हुआ।

Who is जिम्मी Tata?  
जिम्मी टाटा रतन टाटा के सगे छोटे भाई हैं, ये टाटा संस और कई अन्य कंपनियों के शेयर धारक हैं, 1989 में अपने पिता नवल टाटा की मृत्यु के बाद उनकी वसीयत के अनुसार वे सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी बने। 

Is Jimmy Tata married? 
कई टाटा कम्पनियों के निदेशक, ILO के सदस्य और पद्म भूषन से सम्मानित Jimmy Tata ने दो शादियाँ करी जिनसे उनके तीन लड़के हैं। 

How much is Net worth of Ratan Tata? 
रतन टाटा के individual networth करीब $1 billion है। 

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