जैविक खेती क्या होती है-
जैविक खेती में रासायनिक कीटनाशकों, रासायनिक उर्वरकों और खरपतवार नाशक का इस्तेमाल नहीं कर के गोबर की खाद, जैविक खाद, कंपोस्ट जीवाणु कल्चर और हरी खाद का इस्तेमाल किया जाता है इससे जमीन की उर्वरा शक्ति काफी तेजी से बढ़ जाती है जिससे कि कम लागत में काफी अच्छी फसल पैदा होने लग जाती है इससे शरीर को भी कोई नुकसान नहीं होता है और शरीर के साथ ही जमीन में भी किसी भी प्रकार का कोई भी खतरनाक केमिकल नहीं जा पाता है। यह जमीन की उर्वरता को बढ़ाने के साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी काफी अच्छी होती हैं।
जैविक खेती के फायदे-
जैविक खेती का पर्यावरण पर प्रभाव- जैविक खेती पर्यावरण के लिए बहुत अच्छी होती है खाद्य पदार्थ, मिट्टी और जमीन पर गिरे हुए पानी के द्वारा होने वाले प्रदूषण में काफी हद तक कमी आती है जैविक खेती से पर्यावरण का भी बहुत अच्छा सा पड़ता है। कचरे का इस्तेमाल जब खाद के रूप में होता है तो कचरे से होने वाली बीमारियों पर बीमारियों में काफी कमी आ जाती है और फसल की लागत भी काफी कम हो जाती है और काफी उत्पादन होने से आमदनी भी बढ़ जाती है इससे नाइट्रेट की लिंचिंग काफी कम हो जाती है और मिट्टी में जैव प्रक्रिया काफी तेजी से बढ़ जाती है यह जमीन की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाने के लिए काफी अच्छी रहती है।
भारत का पहला जैविक राज्य-
भारत का पहला राज्य सिक्किम है, जहां करीब 75000 हेक्टेयर जमीन पर ऑर्गेनिक खेती की जाती है।
जैविक खेती के द्वारा जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ने से बार-बार सिंचाई करने की जरूरत कम रह जाती है जिससे कम पानी में काफी अच्छी फसल पैदा होने लग जाती है।
इससे रासायनिक पदार्थों की निर्भरता कमी आती है जिससे कि लागत में भी कमी आती है और कमाई में वृद्धि होती है और फसलों के उत्पादन तेजी से बढ़ता है और जैविक उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों को भी काफी फायदा मिलता है, और उनकी इकोनामिक कंडीशन पर भी अच्छा असर पड़ता है।
ऑर्गेनिक खेती शरीर के लिए क्यों अच्छी है-
जमीन में खतरनाक रासायनिक पदार्थ नहीं जाने से शरीर कई प्रकार की खतरनाक बीमारियों से बचता है क्योंकि जब रासायनिक पदार्थों का उपयोग खेती उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए किया जाता है, तो पैदावार के लालच में किसान यह भूल जाते हैं कि उनकी जमीन की उर्वरा क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है, शुरू में तो रासायनिक पदार्थों के उपयोग काफी अच्छा उत्पादन होने लगता है लेकिन धीरे-धीरे इनसे जमीन की उर्वरा क्षमता कम होने लगती है और इसके साथ ही उत्पादन कम होता जाता है, जिससे कि आगे चलकर किसानों को काफी नुकसान होता है।
जब रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल खेती में किया जाता है तो यह रासायनिक पदार्थ जमीन के अंदर चले जाते हैं और जब ऐसी जमीन में कोई फसल बोई जाती है तो यह रासायनिक पदार्थ उस फसल, सब्जी व फल के माध्यम से शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं जिससे कि कई प्रकार की घातक बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन ऑर्गनिक खेती में कोई केमिकल का इस्तेमाल नहीं करके वही चीजें इस्तेमाल की जाती है, जो कि पूर्ण रूप से प्राकृतिक हों जिससे कि शरीर को नुकसान नहीं होता है, इसलिए ऑर्गनिक खेती उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के साथ ही शरीर को स्वस्थ रखने का भी महत्वपूर्ण कार्य करती है।
आज काफी सारी बीमारियां बहुत तेजी से पनप रही है इसका सबसे बड़ा कारण रासायनिक खेती है इसलिए अगर रासायनिक खेती का इस्तेमाल न करके ऑर्गनिक खेती का इस्तेमाल किया जाए तो शरीर को काफी हद तक निरोगी रखा जा सकता है। इसलिए हमेशा जमीन की उर्वरा क्षमता को बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए, ना कि शुरू के उत्पादन को देखते हुए आगे के नुकसान की अनदेखी करना।
जैविक खेती से जमीन के जल सोखने की क्षमता बढ़ती है क्योंकि जैविक खेती में जैविक चीजों का इस्तेमाल होने के कारण वे ज्यादातर चीजें पानी को सोख लेती है, जिससे कि धरातल में पानी सोखने की क्षमता बढ़ती है। जमीन का वाटर लेवल बढ़ता है, इसलिए पर्यावरण के लिए भी जैविक खेती काफी अच्छी होती है।
ऑर्गेनिक खेती से जमीन में नमी बनी रहती है जिससे वातावरण ठंडा होता है गर्मियों के दिनों में काफी राहत मिलती है।
रासायनिक खेती से जमीन में मौजूद अच्छे जीवाणु जिनसे कि फसल को फायदा पहुंचता है वह भी नष्ट हो जाते हैं जिसके कारण शुरू में तो रासायनिक खेती से काफी अच्छी पैदावार हो जाती है, पर आगे जाकर जमीन की उर्वरक क्षमता नष्ट होती जाती है, जिससे पैदावार गिरती जाती है, पर ऑर्गेनिक खेती से जमीन की उर्वरा शक्ति धीरे धीरे बढ़ती जाती है, जिससे कि अचानक से तो बहुत ज्यादा पैदावार नहीं होती है, लेकिन आगे जाकर उत्पादन बढ़ता जाता है।
आजकल बाजार में ऑर्गेनिक फूड के नाम पर रासायनिक केमिकल से बनी हुई सब्जियां बेची जा रही है जो कि स्वास्थ्य के लिए बहुत ही घातक है, अगर आप इन सब्जियों का लम्बे समय तक इस्तेमाल करते हैं तो आप गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं इनसे बचने के लिए जरूरी है कि आप सही तरीके से ऑर्गेनिक farming से पैदा की गयी चीजों को ही काम में लें। आप खुद भी अपनी जरूरत के अनुसार अपने घर पर भी ऑर्गेनिक सब्जियां उगा सकते हैं। कम से कम आपको शुद्ध सब्जियां तो मिली ही सकती हैं, तो आइए हम जानते हैं कि घर पर ऑर्गेनिक सब्जियों कैसे उगाई जाती है। आपको इनसे बेहतर स्वास्थ के साथ ही बेहतरीन स्वाद भी मिलेगा।
आपका घर कितना ही छोटा क्यों ना हो, सही तरीका अपनाकर आप काफी सारी सब्जियां बहुत कम समय में उगा सकते हैं।
घर में बचे हुए कचरे से जैविक खाद कैसे बनाएँ-
आपके घर का कचरा जो कि आप फैंक देते हैं जैसे कि फलों सब्जियों के छिलके, कॉफी, चाय पत्ती या कोई और चीज जिसे आप फेंक देते हैं, आप सही तकनीक अपनाकर उनसे ही काफी सारा कंपोस्ट खाद बना सकते हैं। और आप काफी सब्जियों का उत्पादन अपने घर पर ही कर सकते हैं, केवल तरीका यह है कि आपको सहित टेक्निक अपनानी पड़ेगी, अगर आप अच्छी खासी पैदावार चाहते हैं तो।
इसके लिए आप एक डिब्बे में चारों तरफ पानी डालें और फिर घर के गलने लायक कचरे, जैसा कि ऊपर बताया गया है उसमें डालें, साथ ही उसमें पेड़ पौधों के पत्तों को उसमें डाल दे।
इसके अपघटन के लिए इसमें सूक्ष्मजीवों का होना बहुत जरूरी है जिसके लिए आप इसमें गाय का गोबर भी मिला सकते हैं, साथ ही इसमें थोड़ी सी छाछ भी मिलाई जा सकती है। इस डिब्बे में छोटे-छोटे छिद्र कर दें। ताकि इसमें ऑक्सीजन आती रहे, इससे इसमें कीड़े भी नहीं पनपेंगे और बदबू भी नहीं आएगी। या फिर आप इसमें ऊपर नीचे उछाला देते रहे।
इसकी नमी को कंट्रोल करने के लिए इसमें सूखे पत्ते नारियल के छिलके बीच-बीच में मिलाते रहें।
और इसमें बीच-बीच में कचरा भी डालते रहें, ऐसा करने से 40 से 45 दिन में खाद बनकर तैयार हो जाती है और आप उसे मिट्टी में मिलाकर गमले में डालकर उसमें बीज बोकर कर ऑर्गेनिक खेती घर में ही कर सकते हैं।
यह बेहद ही सरल तरीका है घर में सब्जियां उगाने का, इससे आपको अच्छी सब्जियों के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य भी मिलेगा।
रासायनिक खेती और ऑर्गेनिक खेती से उगाई गई सब्जियों के स्वाद में काफी अंतर होता है आप देख पाएंगे कि ऑर्गेनिक खेती से जो सब्जियां उगाई जाती है, उनमें काफी अच्छा टेस्ट आता है और वह गुणकारी भी काफी होती है इसलिए दोस्तों हम सलाह देते हैं कि आपको हमेशा ऑर्गेनिक रूप से उगाई गयी फल और सब्जियों का इस्तेमाल करना चाहिए, इससे स्वाद भी बढ़ता है, सेहत भी बढ़ती है और पर्यावरण भी शुद्ध रहता है।
