अस्थमा सांस से संबधित एक बीमारी है, जिसमें श्वास नली में सूजन आ जाती है। जिससे श्वास नली सिकुड़ जाती है, जिसके कारण श्वास lungs तक नहीं पहुँच पाती है, और व्यक्ति को श्वास लेने में काफी परेशानी आने लगती है और सर्दियों में इस बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को ये बीमारी काफी परेशान करती है। और बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण भी इस बीमारी के मरीज काफी बढ़ जाते हैं।
अस्थमा के लक्षण-
अगर इसके सामान्य लक्षणों की बात करें तो इसमें सांस लेने में कठिनाई जिसके कारण जोर-जोर से सांस लेना, दौरे के रूप में खांसी का चलना, सांस का फूलना जैसी समस्याएँ होने लगती है। कई बार बहुत ज्यादा समस्या होने पर सांस में सींटी की आवाज आने लगती है। अस्थमा में खांसी होने पर कफ बाहर नहीं निकल पाता है।
अगर आपको कोई ह्रदय रोग नहीं है फिर भी आपके सीने में जकड़न की समस्या रहती है तो भी यह अस्थमा की समस्या हो सकती है।
अस्थमा की समस्या रात को या सुबह को ज्यादा गंभीर हो सकती है। इसका सीधा मतलब ये भी लगाया जा सकता है। कि ढंड में यह बीमारी ज्यादा परेशान करती है।
अस्थमा के कारण-
अस्थमा का कोई एक कारण नहीं होता। इसके बहुत सारे कारण होते हैं। जैसे परफ्यूम की सुगंध, धूल के कण, आटे की धूल, कुछ फूलों के पराग, पशुओं के बालों के रेशे, दीमक, सिगरेट की धुआं, वायु प्रदूषण, पैन्ट की गंध, सुगन्धित उत्पाद, एस्पिरिन या कुछ अन्य दवाएं, खाद्य पदार्थ में सल्फाइट, लगातार रोना या लगातार हँसना, तनाव, संक्रमण, पारिवारिक इतिहास, मोटापा, खाने के छौंक, मच्छर भगाने वाली coil की धुआं आदि।
अस्थमा कितने प्रकार के होते हैं-
अस्थमा कई प्रकार के होता है जैसे-
Allergic अस्थमा-
ये अस्थमा, एलर्जिक पदार्थों जैसे धूल मिटटी, परफ्यूम की गंध, खटमल, किसी विशेष प्रकार के फूलों के पराग कण आदि से होता है।
Non Allergic अस्थमा- जब व्यक्ति तनाव में होता है और उसे अचानक सर्दी लगने लगे या सर्दी-जुकाम लगने लगे, तो इसे नॉन एलर्जिक अस्थमा कहते हैं।
ऑक्यूपेशनल अस्थमा-
इस तरह का अस्थमा किसी एक ही काम को रोज करने के दौरान अचानक से होता है।
एक्सरसाइज इनड्यूस अस्थमा-
जब व्यक्ति बहुत अधिक excercise करता है या अधिक शारीरिक श्रम करता है तो इस तरह के अस्थमा की शिकायत होने लगती है।
चाइल्ड ऑनसेट अस्थमा-
इस प्रकार के अस्थमा की शिकायत केवल बच्चों में होती है जैसे-जैसे इस तरह के अस्थमा से पीड़ित बच्चे बड़े होने लगते हैं। इनकी अस्थमा की शिकायत स्वतः ही दूर होने लग जाती है। यह अस्थमा ज्यादा गंभीर नहीं होता है।
अस्थमा का पता लगाने के लिए टेस्ट-
अस्थमा का पता लगाने के लिए डॉक्टर मुख्य रूप से स्पाइरोमेट्री टेस्ट की सलाह देते हैं। इससे आपके फेफड़ों की क्षमता का पता चलता है, इसमें स्पाइरोमीटर के द्वारा ये पता लगाया जाता है कि आपके फेफड़े कितनी हवा को अपने अंदर रोक सकते हैं। और हवा आपके फेफड़ों में कितनी आसानी से अंदर जाती है, और बाहर आती है, इसके परिणाम मान और ग्राफ के रूप में मिलते हैं।
लेकिन 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अस्थमा का पता लगाने के लिए इस टेस्ट की सलाह नहीं दी जाती है।
अस्थमा का इलाज-
- अस्थमा के मरीजों को हरे पत्तेदार सब्जियों का सेवन जरूर करना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां फेफड़ों में कफ को रुकने नहीं देती हैं जिससे अस्थमा का अटैक नहीं होता है। विशेषकर पालक और गाजर अस्थमा में बहुत ही फायदेमंद होती है।
- लहसुन, अदरक, हल्दी और काली मिर्च अस्थमा से लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
- विटामिन C का भरपूर इस्तेमाल भी अस्थमा को हमारे शरीर से दूर रखता है विटामिन C में भरपूर मात्रा में antioxidants होते हैं जो फ्री रेडिकल्स से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं। जिससे अस्थमा के attack का खतरा काफी हद तक कम रह जाता है।
- गर्म पानी का सेवन भी अस्थमा से काफी हद तक आपको बचा सकता है इसलिए रोज करीब 10गुनगुने पानी और खासकर सुबह के समय इसका इस्तेमाल जरूर करें इससे अस्थमा के अलावा BP, कब्ज़, शुगर, मोटापा,हृदयरोग जैसी कई समस्याओं में आपको सकता है।
- ब्राउन Rice- ब्राउन राइस फेफड़ों से सम्बंधित बीमारियों खासतौर पर अस्थमा के लिए काफी फायदेमंद है।
- दालें- दालों में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन होता है, खासतौर पर पीली और हरी मूंग दाल, काला चना, सोयाबीन, कुलथी फेफड़ों के लिए लिए काफी फायदेमंद होती है।
- सेब- ब्रिटेन में हुए एक प्रयोग में ये पता चला है कि जो लोग नियमित रूप से सेब का सेवन करते हैं उनमे सेब ना खाने वाले लोगों की तुलना में अस्थमा का ख़तरा 32% तक कम होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार ऐसा फ्लैवोनॉएड्स के कारण होता है फ्लैवोनॉएड्स फेफड़ों तक खून पहुंचाने वाले नसों खोल देती है।
- सर्दियों में गुड़ और दूध का सेवन भी अस्थमा के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। गुड़ और दूध में प्रचुर मात्रा में मौजूद प्रोटीन, पौटेशियम, अच्छी फैट, विटामिन B, फॉस्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, कॉपर, और ZINC आदि कई प्रकार के माइक्रो न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। यह इम्युनिटी बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।
अस्थमा को दूर भगाने वाली आयुर्वेदिक औषधियां-
- कनकासव- श्वांस, खांसी, अस्थमा, सीने में कफ जमना, में कानकासव काफी फायदेमंद होता है। इसमें मुख्य रूप से कनक अर्थात्त धतुरा का मुख्य रूप से प्रयोग किया जाता है इसके अलावा वासा, कंटकारी एवं मधुक समेत 14 जड़ी बूटियां होती है।
- पुष्करमूल- ये भी अस्थमा और श्वास सम्बन्धी बीमारियों में काफी फायदेमंद है।
- कण्टकारी अवलेह- कण्टकारी अवलेह अस्थमा में काफी फायदेमंद है। ये गले में मौजूद चिपचिपे पदार्थों को साफ़ करने में अपनी अहम भूमिका निभाता है।
- सितोपलादि चूर्ण- सितोपलादि चूर्ण में मौजूद जड़ी-बूटियां श्वसन तंत्र और फेफड़ों को मजबूती प्रदान करने के साथ ही ऊर्जा भी प्रदान करती है। ये अस्थमा की अचूक औषधि है।
- अगस्त्यहरीतकी अवलेह- अगस्त्यहरीतकी अवलेह फेफड़ों को शक्ति प्रदान करती है। यह श्वसन सम्बन्धी कई बीमारियों के लिए काफी फायदेमंद होती है। इसके अलावा ये खांसी और हिचकी में भी फायदेमंद है।
- च्यवनप्राश- च्यवनप्राश में काफी सारी जड़ी बूटियों के साथ में काफी अच्छी मात्रा में विटामिन C होता है। जो कि अस्थमा में काफी फायदेमंद होता है।
- वासावलेह- वासावलेह हमारी श्वसन नलिकाओं को चौड़ा करने में मदद करता है. जिसके कारण दम फूलने जैसी समस्या से निजात मिलाती है। यह मुख्य रूप से हमारी श्वसन प्रणाली पर काफी अच्छा काम करता है।
- कण्टकारी- यह फेफड़ों में व्याप्त चिपचिपेपन को साफ़ करने में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- अदरक- अदरक में मौजूद फायदेमंद तत्त्व सांस की समस्या में काफी हद तक फायदेमंद होते हैं। सांस में जकड़न की समस्या में काफी फायदेमंद है।
- अजवायन- अजवायन के एंटी-इंफ्लामेंटरी गुण अस्थमा में काफी फायदेमंद होता है।
- अडूसा- अडूसा में मौजूद एंटी-इंफ्लामेटरी गुण अस्थमा में काफी फायदेमंद है। यह श्वास नलिका और फेफड़ों की सूजन को कम करने में काफी फायदेमंद है। 5-5 ml अडूसा के पत्तों का रस और शहद के साथ में अदरक का रस अस्थमा में काफी फायदेमंद है।
- सहजने की पत्तियों का काढ़ा भी अस्थमा में फायदा पहुंचाता है।
- अनार- अनार का एंटीइंफ्लेमेटरी गुण श्वसन सम्बन्धी परेशानियों में काफी लाभ पहुंचाता है। अस्थमा में इसका इस्तेमाल काफी फायदेमंद सकता है।
- केला- केले में मौजूद पोषक तत्व व एंटीऑक्सीडेंट के अलावा प्रचुर मात्रा में पोटेशियम होता है जो शरीर को स्वस्थ रखने के साथ ही फेफड़ों के लिए भी फायदेमंद होता है। और श्वास के आवागमन को सुगम बनाता है।
- तुलसी- तुलसी में मौजूद एंटीऑक्सीडेन्ट्स अस्थमा में काफी फायदेमंद है, इसलिए अस्थमा से परेशान लोगों को तुलसी का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।
अस्थमा में किन चीजों से परहेज करना चाहिए?
अस्थमा में ठंडी, सल्फाइट वाली, गैस बनाने वाली चीजों के साथ ही fast food से भी बचना चाहिए।
